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आरती आशावरी माताजी

जय आशावरी माता, मैया जय आशावरीमाता।
जो कोई तुमको ध्यावे, सब दु:ख मिट जाता || टेर ॥
गढ़ राजौर निकट में, धाम तेरा आला।
धन्य अलवर देश को, फेरे सब माला ||1||
पर्वत ताल पर मन्दिर, शोभा अतिभारी।
भक्तन हित सुखकारी,असुरन भय कारी ||2||
लूला लंगड़ा आवे, शरण पडै थारी।
सच्चे मन से सुमर`या, कष्ट कटे भारी ||3||
निर्धन कोधन देवे, बांझन सुत दाता।
ऋषि मुनि नर देवा, तेरा गुणा गाता ॥4॥
बाजत नोबत द्वारे, अरु मृदंग डेंरू।
चौसठ जोगन नाचत, नृत्य करतभैंरु ||5||
अति श्रृंगार सुहावन, ऊपर छत्र फिरे।
सिंह सवारी सोहे, कर में खडग धरे ।।6।।
आशावरी माता जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत “शम्भुदास” सेवक, मन बांछित फल पावे ॥
जय आशावरी माता, मैया जय आशावरी माता।
जो कोई तुमको ध्यावे, सब दुःख मिट जाता || टेर ॥

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